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Rahul Kumar

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Suppression Of a Landmark Judgement by the Govt

Posted On 7 Jul, 2015 Others में

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Arbind Kumar Choudhary and Anr vs The State of Bihar and Ors,CWJC No-15594 of 2013,finally decided by the Patna High Court on 11/3/2015 must have been one of the most landmark order in the history of Indian Courts,but prima facie somehow appears to be the imposition of censorship by the Govt of Bihar against the law websites to not publish this order.

Perhaps,this order is not available on any law website,but the irregularities committed in a non-governmental recognised sanskrit school namely Bharti Sanskrit High School,Kalyanpur Basti,Samastipur in course of appointments of its Acting Head Master and one Clerk by the Ad hoc Committee of the school and thereafter approval of same by the Bihar Sanskrit Shiksha Board due to absence of statutory provisions made the court to direct the govt to frame a definite rules in respect of appointments and constitution of the Managing Committee for all sanskrit schools, ultimately the rules notified in Bihar Gazette on 26/2/2015.

Dispute in a school changed the rules.

……………………….

Facebook Status Of 20 June 2015-

मेरा क्लासमेट बमशंकर झा ने एक बार फिर फंसाने की साजिश रची।इस बार उसने NIRALI PRIYADARSHINI DASAUT नाम से फेसबुक एकाउंट बनाकर मुझे मैसेज करके खुद को रेप विक्टिमबताकर रेप से लड़ने के लिए वकील बनने और रेप से लड़ने के लिए मेरा मदद मांगने समेत महिला अधिकार की बात कर मुझे भावनात्मक ब्लैकमेल कर उस कथित निराली के प्रेम-जाल में फंसाने की साजिश रची।वैसे,मैं फंसने वाला नहीं था।मुझे बमशंकर पर संदेह इसलिए हुआ क्योंकि वह एक रेप पीड़ित महिला के बारे में मुझे बता चुका था जिसने वकील बनकर रेप आरोपी को सजा दिलवाई थी,उसने अपने टिप्पणी में बाहरी सुन्दरता को नकारते हुए प्रकृति पर जोर दिया,जैसा मैं बमशंकर को बोला करता था और उसका डेरामेट बाबू साहब शर्मा समेत अमितभाईजी,राजाजी,जग्गूजी उसके फ्रेन्ड लिस्ट में थे और बमशंकर ही इन सभी को जानता है।जब मैंने कॉल करने कहा तो उसने मना कर दिया।मैंने रेप का शिकायत भेजने कहा लेकिन नहीं भेजा।फिर मैंने बमशंकर को फोन करके कहा कि निराली नाम का एकाउंट उसी का है तो कुछ घंटे बाद ही बमशंकर ने मुझे एक लड़की से फोन करवा दिया जो खुद को निराली बताने लगी लेकिन नंबर बमशंकर के नाम से मेरे मोबाइल में पहले से ही सेव था।बमशंकर ने कभी इस नंबर से मुझे फोन किया था,इसलिए सेव कर लिया था।कथित निराली द्वारा फोन करने के बाद जब मैंने पुनः इस नंबर पर फोन किया तो बमशंकर का एक डेरामेट ने फोन उठाया जिसने कहा कि वह कमरा में मोबाइल छोड़कर चला गया था और बमशंकर ने ही मोबाइल लेकर लड़की से बात करवाया होगा।बमशंकर झा बोल रहा है कि उसका डेरा या डेरा में बाहर से आने वाला कोई लड़का उसको फंसाने का चाल चल रहा है और उसी ने ये सब किया है।लेकिन सारे साक्ष्य बमशंकर के खिलाफ है और उसका डेरामेट जिसके नंबर से लड़की ने फोन किया,उसकी भूमिका भी संदिग्ध है।किसी तीसरे की चाल बताकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।तीसरे का कोई मंशा भी नहीं दिखता और ना ही तीसरे के खिलाफ कोई साक्ष्य है।

FACEBOOK STATUS OF 22 JUNE 2015-

कुछ मित्रों का कहना है कि मेरा एक क्लासमेट द्वारा जो साजिश रची जा रही,उसे फेसबुक पर अपडेट नहीं करना चाहिए था और आपस में सुलझा लेना चाहिए था।
मेरा वो क्लासमेट मेरे फ्रेन्ड लिस्ट के कई फ्रेन्ड का फेसबुक फ्रेन्ड बन गया है।अपडेट करने का सबसे बड़ा मकसद है कि जिन मित्रों का मेरा वो क्लासमेट फ्रेन्ड बना है,उससे वैचारिक व सामाजिक रुप से दूर रहे।वो आपसे भी नजदीकी बनाकर आपके विरुध्द भी साजिश रच सकता है।कुछ मित्रों को कन्फ्यूजन हो रहा है कि उसी क्लासमेट ने ही साजिश रचा है या नहीं।किसी लड़की के साथ अपने कमरे में बंद करने की उसकी योजना के बारे में उसने खुद स्वीकारा है,जिसका मेरे पास रिकाडिंग भी है।लड़की के नाम से फेसबुक एकाउंट बनाकर मुझे फंसाने की साजिश रचने के आरोप को वो नहीं स्वीकार रहा है,बल्कि इसे अपने किसी करीबी का चाल बता रहा है,लेकिन सारे तथ्य मेरा उस क्लासमेट के ही खिलाफ है और एक भी तथ्य किसी तीसरे के खिलाफ नहीं है।बगैर तथ्य का तीसरे पर आरोप फेंकना शातिर अपराधी की पहचान है और ऐसे दलील को स्वीकार करना अंधेर नगरी,चौपट राजा वाली कहानी की तरह है।
जो मित्र आपस में सुलझाने का सलाह दे रहे हैं,आग्रह है वो खुद सुलझा दे।
………………

HACKING IS PUNISHABLE OFFENCE U/S 66 OF THE INFORMATION TECHNOLOGY ACT,2000 WHICH PROVIDES PUNISHMENT UPTO THREE YEARS OR FINE UPTO 2 LAKHS RUPEES OR WITH BOTH.IF HACKING IS COMMITTED,THEN THERE IS ALMOST THE UNAUTHORISED ACCESS TO THE ACCOUNT OF OTHERS AFTER USING PASSWORD AND USERNAME AND FRAUDULENTLY USING PASSWORD AND USERNAME IS PUNISHABLE U/S 66C OF THE IT ACT UPTO THREE YEARS AND WITH FINE UPTO ONE LAKHS.INSTEAD OF USING THE TERM ‘OR’,THE TERM ‘AND’ IS USED,SHOWING THAT FINE IS MANDATORY U/S 66C OF THE ACT.
IN MOST OF THE CASES,POLICE REFUSE TO REGISTER THE FIR BY MAKING EXCUSE TO MOVE TO CYBER CRIME CELL,BUT IT IS EVIDENT FROM THE PROVISIONS CONTAINED U/S 78 AND 80 OF THE ACT THAT THE DEPUTY SUPERINTENDENT OF POLICE HAS BEEN CONFERRED SPECIAL POWERS.SECTION 78 MANDATES THAT ANY OFFENCE UNDER THIS ACT SHALL BE INVESTIGATED BY THE OFFICER NOT BELOW THE RANK OF THE DSP AND SECTION 80 PROVIDES THAT THE DSP SHALL HAVE THE POWER TO ENTER INTO PLACE,SEARCH AND ARREST WITHOUT WARRANT.
PROCEDURES REGARDING HOW TO GRAB AND IDENTITY CYBER OFFENDERS WITH THE USE OF TOOLS AND TECHNOLOGIES HAVE NOT BEEN PROVIDED IN THE IT ACT AND IT IS A GREAT FAULT.AS PER THE PROVISIONS,IT IS EVIDENT THAT THE POLICE STATION MUST REGISTER FIR AND AFTER REGISTERING FIR,SAME MUST BE FORWARDED TO THE DSP FOR INVESTIGATION AND FURTHER ACTIONS,BUT I THINK,IT IS BETTER TO MOVE CYBER CRIME CELL AS THEY ARE EQUIPPED WITH TOOLS AND TECHNOLOGIES.



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