VISION FOR ALL

Rahul Kumar

275 Posts

32 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8093 postid : 778763

एक वैकल्पिक साम्यवाद

Posted On: 31 Aug, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

एक वैकल्पिक साम्यवाद

कार्ल मार्क्स का साम्यवाद अपने मूल सिध्दांत से भटका दिया गया या साम्यवाद
के नाम पर तानाशाही चालू हो गई या ये सिध्दांत किसी भी देश में स्थायी रुप
से टीक नहीं सकी,इसका सबसे बड़ा कारण मार्क्स द्वारा प्रबंधन पर ध्यान नहीं
देना है।उत्पादन के साधन और वितरण पर सभी मजदूरों का निश्चित रुप से बराबर
अधिकार होना चाहिए लेकिन जब सभी मजदूर लाभ को बराबर हिस्से में बांट ले
तो फिर आगे की उत्पादन,तकनीकि विकास और उत्पादन बढ़ाने के लिए पूँजी कैसे
आएगी?पूँजीपति की अनुपस्थिति में फैक्ट्री का प्रबंधन कौन करेगा?इन दो
सवालों का जवाब मार्क्स ने नहीं दिया।
सारे मजदूर मिलकर प्रबंधन नहीं कर सकते ,इसलिए मजदूरों का एक प्रबंधन बोर्ड
होना चाहिए जिसका सदस्य कुछ मजदूरों को ही बनाना चाहिए और सदस्य का
निर्वाचन तय अवधि के लिए मजदूरों द्वारा होना चाहिए।ये Labour Board
फैक्ट्री को देखेगी और सभी मजदूरों के बीच समान रुप से वितरीत होने वाली
लाभ का कुछ हिस्सा Labour board द्वारा रख लिया जाएगा जिस पूँजी का उपयोग
आगे की उत्पादन,तकनीकि विकास और उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

ये मेरे द्वारा सोचा गया एक वैकल्पिक साम्यवाद है।
वस्तुतः मैं साम्यवाद का समर्थक नहीं हूँ,लेकिन मैंने उस सिध्दांत के खामियाँ के आधार पर उसमें संशोधन करने का कोशिश किया है।

…………………….

गीता के मूल 108 श्लोकों में संपूर्ण मानवीय दर्शन निहित है लेकिन इसे परवर्ती काल में 700 श्लोंको का ग्रन्थ बनाकर गरीब- विरोधी बना दिया गया है जो वास्तव में श्रीकृष्ण का अपमान है।

गीता 17वाँ अध्याय 13वाँ श्लोक-

विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम्।
श्रध्दाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते।।

अर्थांत,शास्त्रविधि से हीन,अन्नदान से रहित,बिना मन्त्र के,बिना दक्षिणा के और बिना श्रध्दा के किये जानेवाले यज्ञ को तामस यज्ञ कहते हैं।

एक गरीब अन्नदान और दक्षिणा देने का सामर्थ्य नहीं रखता।मतलब ऐसे यज्ञ को तामस यज्ञ कहकर एक गरीब को अन्नदान और दक्षिणा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।श्रीकृष्ण के मूल संदेश में अपना संदेश को जोड़कर घोर पुराणपंथी ने गरीबों को भी धर्म का डर दिखाकर लूटने का युक्ति खोज लिया।

…………………………….

गाँधीजी के ब्रह्मचार्य के प्रयोग को मैं गलत मानता हूँ।आप यदि ब्रह्मचार्य का पालन कर रहे हैं,तो इसे सिध्द करने की क्या जरुरत है?और सबसे बड़ी बात ये कि किसी महिला के साथ नग्न अवस्था में सोने के बाद आप या उस महिला के बयान के आधार पर ही कैसे मान लिया जाए कि आपने ब्रह्मचार्य का पालन किया क्योंकि कोई तीसरा व्यक्ति तो वहाँ पर गवाह के रुप में मौजूद नहीं था।चार यम अर्थांत सत्य,अहिंसा,अस्तेय और अपरिग्रह का जो प्रयोग गाँधी ने किया,वह प्रयोग सारे समाज के बीच हुआ।लेकिन पाँचवा यम ब्रह्मचार्य का प्रयोग एक बंद कमरा में सीमित थी,जिसकी मान्यता नहीं दी जा सकती।
किसी गैर-महिला के साथ नग्न अवस्था में सोना,एक चरम पुरुषवादी मानसिकता है।महिला क्या आपको सिर्फ एक सोने या संभोग की वस्तु दिखती है,जिसके साथ नग्न सोकर आप ये सिध्द करने चले हैं कि आप ब्रह्मचारी है।मान लेते हैं कि आपने सोने के बाद ब्रह्मचार्य का पालन किया,लेकिन ब्रह्मचार्य का प्रयोग करने का तरीका ही गलत है क्योंकि समाज में यदि लोग ऐसा करने लगे तो ना जाने एक पुरुष या एक स्त्री कितने स्त्री या पुरुष के साथ सो जाए और सामाजिक-तंत्र बर्बाद हो जाए।
………………………

अरबी भाषा में जिहाद का अर्थ होता है अल्लाह की राह में संघर्ष करना।कुराण में
दो तरह का जिहाद अरबी भाषा में बताया गया है,जिसे हिन्दी में आंतरिक और
बाह्य जिहाद कह सकते हैं।आंतरिक जिहाद आंतरिक विकारों से युध्द करना है और बाह्य जिहाद बाह्य विकारों से।इसका एक मतलब कुछ विद्वान ये भी निकालते हैं कि आंतरिक जिहाद उस युध्द
को कहा गया है जो धर्म को कमजोर करने वाली आंतरिक संकट से लड़ा जाता
है।अर्थांत जब इस्लाम धर्म को ही अंदर से ही तोड़ने का कार्य किया
जाए।बाह्य जिहाद उस युध्द को कहा गया है जो इस्लाम धर्म पर खतरा उत्पन्न
करने वाले बाह्य कारक के विरुध्द लड़ा जाता।लेकिन आज कोई बाह्य खतरा
नहीं।उसके बावजूद जिहाद कहाँ से आ गया?अरब में जब इस्लाम का उदय हुआ था तो
उस समय लोग कबीलों में रहते थे और उन्हें बाहरी आक्रमण का खतरा रहता था और
संभवतः इसी स्थिति से बचने के लिए बाह्य जिहाद का निर्माण हुआ।पैगंबर को डर
लगता था कि इस्लाम विघटित ना हो जाए,जैसा कि शिया और सुन्नी में हो भी गया
और इस स्थिति से बचने के लिए आंतरिक जिहाद का निर्माण हुआ हो। लव जिहाद
एक आधारहीन शब्द है जिसका आंतरिक और बाह्य जिहाद से कोई संबंध नहीं है।

…………………………….



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran