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Rahul Kumar

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प्रत्याशित आवश्यकता से ज्यादा की सारी संपति सरकार की होगी।

Posted On: 17 Aug, 2014 Others में

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प्रत्याशित आवश्यकता से ज्यादा की सारी संपति सरकार की होगीI
महात्मा गाँधी अपने अर्थशास्त्र को नैतिकता और आध्यात्मिकता से जोड़कर देखते थे,लेकिन उनकी ये अर्थशास्त्र पूँजीपतियों के हित में यहाँ तक कह डाला कि बड़े उद्योग में मजदूरों को मजदूर ही बने रहना चाहिए।अर्थशास्त्र को प्रकृति से जोड़कर देखना आध्यात्मिकता से जोड़कर देखने से बेहतर है।हम देखते हैं कि प्राकृतिक रुप से सभी मनुष्य समान है,फिर कोई पूँजीपति या मजदूर क्यों?जन्म से ही हरेक व्यक्ति को भोजन व आवास चाहिए,फिर आर्थिक सुरक्षा के लिए राशि जन्म से ही क्यों नहीं मिलती?यदि मनुष्य मानवीय समाज में बंधा नहीं होता तो अन्य प्राणियों की तरह प्रकृति में स्वतंत्र रुप से उसे भी भोजन व आवास सुलभ हो जाता फिर अभी मनुष्य को सुलभ क्यों नहीं हो पाता?अर्थशास्त्र के तथाकथित जनक एडम स्मिथ ने भी प्रकृतिवाद का सिध्दांत दिया है लेकिन ये इस सिध्दांत की आड़ में प्राकृतिक संसाधन के दोहन करने का खुली छूट देते हैं ताकि पूँजीपतियों द्वारा बेरोकटोक संसाधनों का दोहन किया जा सके।प्रकृतिवाद के बारे में मैं भी सोचता हूँ जिसमें संपति पर किसी खास का अधिकार होना ही नहीं चाहिए,मजदूर का भी नहीं।प्रत्याशित आवश्यकता से ज्यादा की सारी संपति सरकार की होगी।

……………………..

अब मैं यकीन करने लगा हूँ कि स्मृति ईरानी के पास शैक्षणिक योग्यता के साथ
साथ दिमागी योग्यता का भी अभाव है।इन्हें 6 दिन और 3 साल के कोर्स में
फर्क मालूम नहीं है।कोर्स सर्वप्रथम अध्ययन करने के लिए होता है,डिग्री के
लिए नहीं।6 दिन में डिग्री मिल सकती है,लेकिन हम 6 दिन में किसी कोर्स का
अध्ययन पूरा नहीं कर सकते।ये शिक्षा-विरोधी और लोगों को अध्ययन से दूर कर
फर्जी डिग्रीयों पर केन्द्रित करने वाली बात बोल रही है।लोकसभा चुनाव में
दो बार पराजित हो जाने,शैक्षणिक योग्यता को लेकर शपथ-पत्र में अलग अलग
जानकारी देने और कम शैक्षणिक योग्यता होने के बावजूद स्मृति ईरानी को
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री क्यों बनाया गया?मंत्री बनाने के पीछे
कुछ गलत रहस्य या गलत उद्देश्य तो जरुर है।जिस स्मृति ईरानी ने मोदी को
मुख्यमंत्री से हटाने के लिए गुजरात दंगा के बाद आमरण अनशन पर जाने का धमकी दिया था,उसे ही आज
मोदी ने अपना मंत्री बना दिया।ऐसा क्यों?

…………………………

Raksha Bandhan has mainly been confined between a blooded sister-brother but
not a single significant mythological or historical story is available where a blooded sister tied a thread to her brother-

1.Indra’s wife Sachi tied a sacred thread to Indra to save her husband’s kingdom,as per Bhavishya Purana.

2.Lakshmi tied a Rakhi to King Bali,as per Bhagavata and Vishnu Purana.

3.Yasoda tied a Rakshi to Krishna and prayed for his safeguard,as per chapter V of Vishnu Purana.

4.Kunti tied a Rakhi to Abhimanyu before the war of Mahabharta.

5.When Alexander invaded India in 326 BC,Roxana,wife of Alexander sent a Rakshi to King Porus and Porus personally prevented himself to attack Alexander.

6.In 1535 AD,Widowed queen of Chittor Karnavati sent a Rakhi to King Humayun to save her modesty from Bahadur Shah,Sultan Of Gujarat.

So,under a conspiracy,Raksha Bandhan has mainly been confined between a blooded sister-brother,so that a boy can’t be morally bound to look other girls with a view of his sister…

………………

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