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Rahul Kumar

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इन तीन निर्दोष को गिरफ्तारी से बचाइए।

Posted On: 19 May, 2014 Others में

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विभूतिपुर थाना कांड संख्या 79/14,दिनांक 1/4/2014,IPC की धारा 341,323,354,506,379,504,427,34 और SC/ST ACT की धारा 3(x) के तहत दर्ज किए गए झूठा मुकदमा की समीक्षा

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समस्तीपुर के विभूतिपुर प्रखण्ड अन्तर्गत पतैलिया पंचायत की दलित महिला मुखिया सुनीता देवी को SC/ST ACT का दुरुपयोग करने और मनरेगा के मजदूरों का राशि गबन करने और फर्जी मास्टर रोल बनाकर राशि का निष्कासन करने के कारण अविलंब गिरफ्तार किया जाना चाहिए।इस मुखिया ने इसके द्वारा मनरेगा में की जाने वाली गबन और फर्जीवाड़ा का विरोध करने वाले तीन निर्दोष लोगों को झूठा फंसा दिया है जिसके कारण इन तीन लोगों का गिरफ्तारी हो सकता है।
सुनीता देवी द्वारा रोजगार सेवक और कार्यक्रम पदाधिकारी के सहयोग से की गई गड़बड़ियों पर एक नजर

(i) एक मृत व्यक्ति और दो बाहर रह रहे व्यक्ति का वन-पोषण (वृक्षारोपण) कार्यक्रम के मास्टर रोल में मजदूर के रुप में नाम दर्ज है।इन लोगों के नाम पर राशि का फर्जी निष्कासन किया गया है।

(ii) सात मजदूरों का 111 दिनों का मास्टर रोल बनाया गया है जबकि अधिकतम 100 दिन का काम ही मनरेगा योजना के तहत मिल सकती है।11 दिनों के राशि का फर्जी निष्कासन किया गया है।

(iii) जिन मजदूरों ने कार्य किया,उसका मास्टर रोल में नाम नहीं है जबकि कुछ ऐसे मजदूरों का नाम मास्टर रोल में है,जिन्होंने काम नहीं किया और इनके नाम से राशि का फर्जी निष्कासन हुआ है और काम करने वाले मजदूरोँ को मजदूरी नहीं दी गई।
ग्रामीण सीताराम ठाकुर मध्य विद्यालय का सेवानिवृत प्रधानाध्यापक हैँ,जो मजदूरों का नेतृत्व कर रहे हैँ।इन्होंने मुखिया के विरुध्द दो बार जिलाधिकारी,दो बार प्रखण्ड विकास पदाधिकारी और दो बार कार्यक्रम पदाधिकारी को मजदूरों के साथ मिलकर शिकायत किया।इसके अतिरिक्त सुनीता देवी कन्या विवाह योजना की एक महिला की राशि उसका फर्जी खाता खुलवाकर डाक घर से रुपया निकाल कर गबन कर दी और एक वृध्द व्यक्ति का कबीर अंत्येष्टि योजना का राशि सादे कागज पर हस्ताक्षर लेकर गबन कर दी।

इन सारे गड़बड़ियों का दस्तावेज सीताराम ठाकुर के पास उपलब्ध है।सीताराम ठाकुर मनरेगा के मजदूरों का निशुल्क जॉब कार्ड बनवाने लगे,निशुल्क वृध्दा पेंशन योजना का स्वीकृति दिलवाने लगे,निशुल्क विंकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने लगे।इनके कार्यों से मुखिया और उसके दलालों का धंधा बंद होने लगा।

जब मनरेगा के तहत गड़बड़ियोँ का खुलासा हुआ तो फिर मुखिया के पास खुद को बचाने के लिए झूठा फंसाने के सिवाय कोई दूसरा उपाय बचा ही नहीँ।

सीताराम ठाकुर जब प्रधानाध्यापक थे,उस समय गरीब बच्चे को कपड़े,कॉपी- किताब अपने पैसे से खरीद कर देते थे,TC निर्गत करने का पैसा नहीं लेते थे और परीक्षा फीस सिर्फ 2 रुपया लेते थे।इन्होंने गाँव में निशुल्क कंबल का वितरण किया है।इन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुका है। शिवनारायण महतो,इनका सहयोगी थे,इसलिए उन्हें भी आरोपी बना दिया गया है।मो रुस्तम मनरेगा का एक मजदूर हैँ,जिन्होंने काम तो किया लेकिन मजदूरी नहीं मिली और फर्जी मजदूर और मास्टर रोल बनाकर इनका मजदूरी का गबन कर दिया गया।इसलिए मो रुस्तम सीताराम ठाकुर के साथ विरोध करने में आगे रहते हैं और इन्हें भी आरोपी बना दिया गया है।

काण्ड का सूचक रंजीत पासवान है जो अब सीताराम ठाकुर को निर्दोष बताते हुए COMPROMISE PETITION दायर कर दिया है लेकिन सीताराम ठाकुर अपने साथ साथ चाहते हैं कि मो रुस्तम और शिवनारायण महतो पर लगे आरोप भी खारिज हो।कांड का चार गवाह मान रहा है कि उसका नाम जानबूझकर गवाह के रुप में दे दिया गया है।रोसड़ा DSP के समक्ष आज दो गवाह ने स्वीकार भी किया है कि आरोप फर्जी है।640 ग्रामीणों ने मुखिया के धांधली के विरुध्द एक PUBLIC PETITION दायर किया है और 90 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण सीताराम ठाकुर पर लगे आरोप को झूठा मान रहे हैँ।

इस काण्ड की मैंने समीक्षा की,जिसमें मुकदमा झूठा होने का उपरोक्त सबूत के सिवाय मुझे और भी सबूत मिले-

1.वृक्षारोपण कार्यक्रम के मास्टर रोल में उन 8 मजदूरों का नाम नहीं है जो इस फर्जी आरोप का सूचक और गवाह हैँ।जब ये लोग मजदूर हैं ही नहीँ,फिर वहाँ पर काम कैसे कर रहे थे।इससे जाहिर होता है कि मुखिया के द्वारा जिन मजदूरों से काम करवाया जाता है उसके जगह पर दूसरे का नाम देकर फर्जी मास्टर रोल बनता है या ये लोग मजदूर हैं ही नहीं,इसलिए वहाँ पर कार्य करने के लिए उपस्थित थे ही नहीँ।

2.घटना 26 मार्च 2014 का बताया गया है लेकिन मास्टर रोल के अनुसार कार्य 15 मार्च तक ही हुई है।जब 26 मार्च को काम हुई ही नहीँ,फिर ये मजदूर 26 मार्च को कार्य कैसे कर रहे थे?

3.कितने रुपये की कमीशन मांगी गई,इसका उल्लेख नहीं है।यदि कमीशन मांगी जाती तो इसका भी उल्लेख होता कि कितने रुपये की कमीशन मांगी गई।

4.कमीशन कोई दबंग प्रवृति का व्यक्ति ही मांग सकता है।सीताराम ठाकुर सेवानिवृत प्रधानाध्यपक हैँ,जिन्हें 17 हजार पेंशन मिलता है और जीवनपर्यँन्त अपने पैसे से समाज सेवा करने में तत्पर रहे हैँ।शिवनारायण महतो और मो रुस्तम महज एक मजदूर है।इसलिए ये लोग मुखिया से कमीशन नहीं मांग सकते।

5.प्राथमिकी का सूचक मनरेगा का एक मजदूर रंजीत पासवान है।उसके फर्दब्यान मेँ लिखा है कि वृक्षारोपन करने के स्थल पर पहुँचने पर चार पाँच मजदूरोँ के साथ हम काम करने लगे।जबकि उसके मिलाकर मुखिया के साथ दुर्व्यव्यवहार और कमीशन मांगने वाली कथित घटना का कुल आठ मजदूर चश्मदीद गवाह हैँ।जब चार पाँच मजदूर ही उस स्थल पर थे जहाँ कथित घटना घटी,फिर आठ मजदूर चश्मदीद गवाह कैसे हो गए?इससे जाहिर होता है कि ये सारे फर्जी चश्मदीद गवाह हैँ।

6.प्राथमिकी मेँ मुखिया सुनीता देवी,पति-शिव कुमार पासवान से कमीशन मांगने,पेड़ उखाड़ने,मुखिया को जान से मारने की धमकी देने,जातिसूचक गाली गलौज करने,मुखिया का करीब 60,000 रुपये का दो भड़ी सोने का चेन छीन लेने और मुखिया की साड़ी खीँचने चाहने का आरोप लगाया गया है।कथित घटना दिनांक 26/03/2014 की बताई गई है,जबकि प्राथमिकी पाँच दिन विलंब से दिनांक 1/4/2014 को दर्ज करायी गई है।प्राथमिकी मेँ विलंब का कारण ग्राम कचहरी का पंचायती बताया गया है।
सर्वप्रथम,नियम के मुताबिक मुखिया या किसी जनप्रतिनिधि का मामला ग्राम कचहरी मेँ नहीँ चल सकता है।SC/ST ACT का मामला भी ग्राम कचहरी मेँ नहीँ चल सकता क्योँकि SC/ST ACT का मामले की सुनवाई सेशन कोर्ट मेँ ही हो सकती है।IPC का धारा 354(छेड़खानी) और 506 का PART II (जान से मारने की धमकी) Non-compoundable offence है,जिसमेँ समझौता नहीँ किया जा सकता।इसलिए धारा 354 और 506 का मामले की सुनवाई ग्राम कचहरी मेँ नहीँ हो सकती।इसलिए ग्राम कचहरी के कारण पाँच दिन विलंब का कारण बताना साजिश को छिपाने का महज एक बहाना है।

7.आरोप मुखिया सुनीता देवी से कमीशन मांगने,उसके साथ गाली गलौज करने,उसे जान से मारने का धमकाने,उसका चेन खीँचने और उसका साड़ी खींचने चाहने पर केन्द्रित है।लेकिन मुखिया होने के बावजूद शिकायत सुनीता देवी के द्वारा दर्ज नहीँ करवायी गई और किसी मजदूर के द्वारा करवायी गई ताकि ये सिध्द किया जा सके कि अभियुक्तोँ ने कमीशन मांगा था और फिर कमीशन देने से मना करने पर इतने दुर्व्यवहार हुई।जब साड़ी खीँचने का प्रयास करने सहित कई अभद्र व्यवहार मुखिया के साथ हुई,तो फिर मुखिया ने खुद शिकायत दर्ज क्योँ नहीँ कराया?

8.प्राथमिकी के अनुसार आठ मजदूर चश्मदीद गवाह हैँ।जब मो रुस्तम ने आठ मजदूरोँ के समक्ष मुखिया का साड़ी खीँचना चाहा तो फिर किसी मजदूर ने प्रतिवाद क्योँ नहीँ किया?ये मजदूर प्राथमिकी दर्ज करवा सकते हैँ,ये मजदूर चश्मदीद गवाह बन सकते हैँ लेकिन ये मजदूर प्रतिवाद नहीँ कर सकते?मजदूरोँ का ये क्रियाकलाप विरोधाभासी और संदेहास्पद है।प्राथमिकी के अनुसार,शिव नारायण महतो मुखिया के गला से करीब दो भड़ी सोने का चेन जिसका कीमत करीब 60,000 रुपया है,छीन लिया और भाग गया।यदि गला का चेन इतने मजदूरोँ के सामने मेँ छीना गया तो इतने मजदूर क्या कर रहे थे?जब शिव नारायण महतोँ गला का चेन छीनकर भागने लगा तो फिर इन मजदूरोँ ने उसे पकड़ा क्योँ नहीँ?तीन अभियुक्त मो रुस्तम,सीताराम ठाकुर और शिव नारायण महतो एक साथ वारदात को अंजाम देने आया था,फिर अकेला शिव नारायण महतो ही चेन छीनने के बाद क्योँ भागा,दो अन्य अभियुक्त क्योँ नहीं भागा?धारा 379 यानि छीना-झपटी करने का ज्यादातर आरोप झूठा होता है और लगभग सभी प्राथमिकी मेँ छीनने के बाद अभियुक्त को भागते हुए दिखाया जाता है,इसलिए इस प्राथमिकी मेँ भी दिखा दिया गया है।जब गर्दन से चेन खीँचा गया तो जाहिर है कि गर्दन मेँ जख्म का निशान होना चाहिए,लेकिन ऐसा कोई निशान मुखिया के गर्दन पर नहीँ है।

9.जब मामला इतना गंभीर था तो फिर सीधे प्राथमिकी करने के बजाय पहले ग्राम कचहरी को क्योँ चुना गया?इससे जाहिर होता है कि मामला उतना गंभीर नहीँ था लेकिन जानबूझकर प्राथमिकी मेँ मामला को गंभीर बनाकर दिखाया गया है।प्राथमिकी के सूचक रंजीत पासवान ने थानाध्यक्ष से प्रार्थना किया है कि हम गरीब मजदूरोँ के जान माल एवं मजदूरी सुनिश्चित करने हेतु उचित कानूनी कार्रवाई करे।प्रार्थना मेँ मुखिया के साथ घटित घटना के विरुध्द कार्रवाई का मांग किया ही नहीँ गया है।इसका मतलब ये होता है कि मुखिया के साथ कोई घटना घटी ही नहीँ।इसका मतलब ये होता है कि ये मजदूर लोग मुखिया के अपने आदमी हैँ और मुखिया के कहने पर फर्जी आरोप लगा रहे हैँ।

10.Sunita Devi has claimed delay of  5 days in lodging FIR  due to
Gram Kachhari (Rural Court Of Sarpanch).But she has no documentary
proofs like the copy of application filed to Gram Kachhari,receipt
given by Gram Kachhari ,Summon Given by Gram Kachhari etc…It clearly
proves that she had not approached to Gram Kachhari.If she would have
approached,then she  would have some documentary proofs…

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648rahul के द्वारा
May 20, 2014

Sunita Devi has claimed delay of 5 days in lodging FIR due to Gram Kachhari (Rural Court Of Sarpanch).But she has no documentary proofs like the copy of application filed to Gram Kachhari,receipt given by Gram Kachhari ,Summon Given by Gram Kachhari etc…It clearly proves that she had not approached to Gram Kachhari.If she would have approached,then she would have some documentary proofs…


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